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बीकानेर: ‘जन मन काव्य यात्रा’ से पुनजीर्वित होगी बीकानेर की मंचीय काव्य परम्परा

आचार्यों के चौक में हुआ पहला आयोजन, कवियों ने पढ़ी कविताएं, प्रकृति ने मेघ मल्हार

‘जन मन काव्य यात्रा’ से पुनजीर्वित होगी बीकानेर की मंचीय काव्य परम्परा
राजसूय
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राजसूय। बीकानेर की साहित्यिक परम्परा अत्यंत समृद्ध रही है। यहां के साहित्य साधकों ने देश और दुनिया में शहर का नाम रोशन किया है। जिले में गद्य और पद्य दोनों विधाओं में भरपूर लेखन हुआ है, लेकिन काव्य परम्परा की बात करें, तो इस विधा में देशभर में बीकानेर को विशेष स्थान मिला है। यहां के अनेक कवियों ने कविताओं में लोक चेतना के स्वर मुखर किए हैं। जब यह कवि मंचों पर इन कविताओं को पढ़ते तो रातें आबाद रहती। शहर के चौक, मोहल्ले दशकों तक इस परम्परा के साक्षी रहे हैं। हरीश भादाणी, भीम पांडिया, भवानी शंकर व्यास ‘विनोद’, सरल विशारद, अजीज आजाद, बुलाकी दास बावरा सरीखे लोक परम्परा के कवियों को सुनने पूरा शहर उमड़ता। रात-रात भर कवि सम्मेलन और गोष्ठियां चलती। 

धीरे-धीरे समय बदला और लोग, मंचीय काव्य परम्परा से दूर होते गए। अब कवि सम्मेलनों और गोष्ठियों का अकाल सा हो गया। कवि लिखें भी तो किसे सुनाएं? मोबाइल और सोशल मीडिया के दौर ने इस संकट को और अधिक गहरा कर दिया। अब लोग कविताएं तो सुनते हैं, लेकिन मोबाइल में। ऐसे दौर में बीकानेर के मोहल्लों की मंचीय काव्य परम्परा को पुनर्जीवित करना सबसे बड़ी जरूरत भी थी और चुनौती थी। चुनौती यह भी थी कि यदि मंच सज भी गया, तो श्रोता कहां से आएंगे? हालांकि पिछले दो वर्षो में बीकानेर पश्चिम विधायक जेठानंद व्यास की अगुवाई मंे बीकानेर स्थापना दिवस के अवसर पर लगातार दो कवि सम्मेलन हुए। मुरलीधर व्यास ‘राजस्थानी’ की स्मृति में कीकाणी व्यासों के चौक में कवि सम्मेलन के दौरान कविताएं गूंजी। 

फिर भी एक समेकित, समन्वित और सतत प्रयास की जरूरत थी, जो मोहल्ला काव्य परम्परा को नया जीवन दे। इस संबंध में कई योजनाएं बनी, अंततः रोटरी क्लब और बीकानेर राॅयल्स और पब्लिक रिलेसंश एंड एलाइड सर्विसेज एसोसिएशन आॅफ राजस्थान (प्रसार) ने बीकानेर की समृद्ध संस्कृति को नया स्वरूप देने का बीड़ा उठाया। दोनों संस्थाओं के सहयोग से शुरू हुआ नवाचार, जिसे ‘जन मन काव्य यात्रा’ नाम दिया गया। दरअसल, ‘जन मन काव्य यात्रा’ उस पहल का नाम है, जिसके तहत बीकानेर की मोहल्लों में होने वाले कवि सम्मेलनों की परम्परा को पुनः प्रारम्भ किया गया।

यदि ‘जन मन काव्य यात्रा’ के कांसेप्ट की बात करें तो इसकी यह परिकल्ना रखी गई कि शहर के विभिन्न मोहल्लों के ऐतिहासिक पाटे ही इन कवि सम्मेलनों के मंच बनेंगे। चौक परिसर आंगन बनेगा और जिस प्रकार हम घर में बैठकर कविताएं सुनते हैं, उसी प्रकार विभिन्न मोहल्लों के पाटों पर के सामने बैठकर कविताएं सुनेंगे। योजना बनने के साथ इसके क्रियान्वयन का दौर शुरू हुआ। दोनों संस्थाओं द्वारा इसकी विस्तृत रूपरेखा बनाई गई। इसके अनुसार यह कवि सम्मेलन जिस चौक अथवा मोहल्ले में आयोजित होगा, उसी चौक या मोहल्ले के दिवंगत कवि को इस कार्यक्रम को समर्पित किया जाएगा। इस समारोह की अध्यक्षता उसी चौक का मौजीज व्यक्ति करेगा। कविताएं पढ़ने वाले कवि शहर के ही होंगे। प्रत्येक कार्यक्रम में अधिकतम 8 कवि अपनी रचनाएं रखेंगे, इनमें मंझे हुए कवि भी होंगे तो नवोदित कवियों को भी मंच दिया जाएग, जिससे इस परम्परा को आगे बढ़ाया जा सके।

यह काव्य यात्रा, पूरे साल चलेगी और प्रत्येक माह ऐसे अलग-अलग मोहल्लों में कवि सम्मेलन होंगे, जहां ‘पाटे’ हैं। यह पाटे ही मंच बनेंगे और चौक रूपी आंगन में बैठक लोग इन कवियों की रचनाओं को सुनेंगे। इसका आगाज 27 सितम्बर को आचार्यों के चौक में आयोजित पहले कार्यक्रम के साथ हो चुका है। पहला कार्यक्रम गौरी शंकर आचार्य ‘अरुण’ को समर्पित रहा। इसमें मोनिका गौड़, मनीषा आर्य सोनी, इरशाद अजीज, संजय आचार्य वरुण, हरि शंकर आचार्य, विप्लव व्यास, बाबू लाल छंगाणी और आनंद मस्ताना जैसे कवियों की भागीदारी रही। आचार्यों के चौक में लगभग तीस वर्षों बाद दोबारा कवि सम्मेलन हुआ। इस दौरान सुखद संयोग भी रहा, कि चार कवियों द्वारा रचनाएं पढ़ने के साथ ही इंद्र ने भी मेघ मल्हार गाया, लम्बे समय से बरसात को तरस रहे बीकानेर पर अमृत तुल्य बूंदें गिरी। 

किसी भी कार्यक्रम का आगाज बरसात के साथ होता है, तो उसे अच्छा संकेत माना जाता है। यहां भी बरसात की बूंदें गिरी तो सभी ने खुशी मनाई। जो कवि, रचनाएं पढ़ नहीं पाएं, उन्हें भी इसका मलाल नहीं रहा। खुशी थी तो यह ठहरा हुआ पानी हिला तो सही। एक शुरूआत हुई और दूसरे की घोषणा। आयोजकों के अनुसार ‘जन मन काव्य यात्रा’ का दूसरा पड़ाव कीकाणी व्यासों का चौक होगा। आयोजन की तिथि होगी 25 अक्टूबर और यह कार्य राजस्थानी के मूर्धन्य साहित्यकार मुरलीधर व्यास राजस्थानी को समर्पित होगा। काव्य सम्मेलन में हिंदी, राजस्थानी और उर्दू तीनों भाषाओं की रचनाओं का वाचन होगा, बीकानेर की बहुभाषाई संस्कृति को पल्लवित करने वाला साबित हो रहा है। 

कुल मिलाकर दशकों बाद एक बार फिर शहर के पाटे, कविताओं से गूंजने लगे हैं। श्रोता पूरी शिद्दत के साथ इन्हें सुन रहे हैं। मनोरंजन के साथ समृद्ध परम्परा को आगे बढ़ा रहे हैं। नए कवियों की खोज और उन्हें मंच मिलने से इस परम्परा को भविष्य भी सुरक्षित और सुनहरा होना प्रतीत हो रहा है। मोबाइल के आज के दौर में यह प्रयास कितना आगे बढ़ेगा यह तो समय ही बताएगा, लेकिन इस दिशा में एक शुरूआत हुई है, जो कि अपने आप में अच्छी पहल है।

डॉ.हरिशंकर आचार्य

लेखक

डॉ.हरिशंकर आचार्य

जनसंपर्क विभाग के उपनिदेशक डॉ.हरिशंकर आचार्य के सरकारी योजनाओं रुचिकर ढंग से लिखे आलेखों को काफी सराहना मिली है। इन्होंने कैरियर की शुरुआत पत्रकारिता से ही की। राजस्थानी व हिंदी के कवि-लेखक भी हैं।

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