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लोकार्पण: 'विरुदावलियों से आगे बढ़, छवियों को ध्वस्त करना पड़ेगा'

अशोक कुमार पांडेय की किताब 'हिंसा-अहिंसा और भगतसिंह ' का बीकानेर में लोकार्पण

'विरुदावलियों से आगे बढ़, छवियों को ध्वस्त करना पड़ेगा'
राजसूय
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राजसूय।  मंगलवार को बीकानेर में देश के प्र यात लेखक अशोक कुमार पांडेय का आना हुआ, क्योंकि पी.वोहरा फाउंडेशन की तरफ से जिला उद्योग संघ सभागार में उनकी बहुचर्चित किताब 'हिंसा-अहिंसा और भगतसिंह' का लोकार्पण होना था। शहर की राजनीति, व्यवसाय, शिक्षा, समाज सहित विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय गणमान्यों की साक्षी में वरिष्ठ पत्रकार दीपचंद सांखला, पी.वोहरा फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष डॉ.परमजीतसिंह वोहरा, साहित्यकार अनिरुद्ध उमट और पत्रकार-लेखक हरीश बी.शर्मा ने 'हिंसा-अहिंसा और भगतसिंह' का लोकार्पण किया। हरीश बी.शर्मा ने इस अवसर पर पुस्तक-चर्चा करते हुए अपनी दृष्टि भी प्रस्तुत की। अशोक कुमार पांडेय ने इतिहास से जुड़े अनेक पक्ष, तथ्य और तर्कों को रखते हुए किताब लिखने के मंतव्य को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि विरुदावलियों से हमें आगे बढऩा पड़ेगा, छवियों को ध्वस्त करना पड़ेगा और इतिहास को इस तरह से पढऩा पड़ेगा कि  हमारे भविष्य का रास्ता बने। मेरी कोशिश भविष्य के रास्ते तलाशने की है। मेरी सफलता इसमें नहीं कि मेरी किताबें कितनी बिकी या मेरे जीते जी मेरी कितनी तारीफें हुई। मेरी सफलता इस में है कि आज से चालीस साल बाद आज के समय पर लिखते हुए अपनी किताब के फुटनोट में चार शब्द लिख देगा कि अशोक कुछ ऐसा कर रहा था तो मेरे लिए यही बड़ी बात होगी।

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इतिहासकार अशोक पाण्डेय की पुस्तक 'हिंसा-अहिंसा और 'भगत सिंह' का विमोचन, गांधी और भगत सिंह की विरासत पर हुई सार्थक चर्चा।

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जिला उद्योग संघ सभागार में मंगलवार शाम आयोजित 'लेखक से मिलिए' कार्यक्रम में इतिहासकार अशोक कुमार पाण्डेय की नवीन पुस्तक 'हिंसा-अहिंसा और भगत सिंह' का विमोचन किया गया।

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कार्यक्रम में अशोक पाण्डेय ने 'इतिहास का सच, राजनीति की स्मृति और समाज का विवेक - गांधी और भगत सिंह की वैचारिक विरासत के संदर्भ में' विषय पर अपने विचार रखे, वहीं लेखक एवं वरिष्ठ पत्रकार हरीश बी शर्मा ने पुस्तक पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम की शुरुआत में पी वोहरा फाउंडेशन के प्रेसिडेंट डॉ. पी एस वोहरा ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा पर प्रकाश डाला और इतिहासकार अशोक कुमार पाण्डेय के जीवन, उनकी लेखकीय यात्रा और उनके वैचारिक अवदान के बारे में विस्तार से बताया। 

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इसके पश्चात माल्यार्पण कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें बीकानेर के साहित्य, राजनीति, शिक्षा और व्यवसाय जगत से जुड़े गणमान्य नागरिकों ने अशोक कुमार पाण्डेय का माल्यार्पण कर आत्मीय स्वागत किया।

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लेखक एवं वरिष्ठ पत्रकार हरीश बी शर्मा ने पुस्तक पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि इतिहासकार अशोक कुमार पाण्डेय की पुस्तक 'हिंसा-अहिंसा और भगत सिंह'  में शहीद भगत सिंह के जीवन, उनके विचारों और भारतीय स्वाधीनता संग्राम के विभिन्न पहलुओं की नई नजर से पड़ताल करती नजऱ आती है। पुस्तक में परंपरागत जीवनी से अलग: यह पुस्तक भगत सिंह की कोई सामान्य या श्रद्धाभाव में लिखी गई पारंपरिक जीवनी नहीं है, बल्कि उनके इर्द-गिर्द बनी कहानियों, समाचारों और ऐतिहासिक छवियों का नए सिरे से विश्लेषण करती है।

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पुस्तक पर सार्थक चर्चा में उपजे कुछ सवालों के जवाब में लेखक अशोक कुमार पाण्डेय ने कहा कि किताब इस बात की पड़ताल करती है कि भगत सिंह को अक्सर गांधीजी के विपरीत एक 'बंदूकधारी' नायक और गांधीजी को उनके सामने 'खलनायक' के रूप में क्यों खड़ा कर दिया जाता है।

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लेखक स्पष्ट करते हैं कि इस किताब को पढऩे पर गांधीजी खलनायक के रूप में नहीं उभरते। उन्होंने बताया कि किताब में भगत सिंह के उन विचारों को गहराई से रेखांकित किया गया है, जिनमें वे मानते थे कि केवल पिस्तौल और बम से क्रांति नहीं आती, बल्कि 'क्रांति की तलवार विचारों की धार बढ़ाने वाले पत्थर पर रगड़ी जाती है'। साथ ही, हिंसा का सहारा केवल विकट आवश्यकता पडऩे पर ही लिया जाना चाहिए। 

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 उन्होंने पुस्तक में महात्मा गांधी द्वारा भगत सिंह को फांसी से बचाने के किए गए प्रयासों और उस समय के राजनीतिक घटनाक्रम पर भी चर्चा की। विगत रहे कि इस पुस्तक को तैयार करने में अशोक कुमार पाण्डेय ने पांच साल तक विभिन्न अभिलेखागारों, पुराने दस्तावेजों और प्रतिबंधित साहित्य का शोध किया है।

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पुस्तक के माध्यम से लेखक अशोक कुमार पाण्डेय का उद्देश्य स्वाधीनता आंदोलन को क्रांतिकारी बनाम सिर्फ अहिंसक के सीमित चश्मे से हटाकर एक संपूर्ण और वास्तविक ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में सामने लाना है। 

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कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार दीपचंद सांखला, शशि मोहन मूंधड़ा,अनिरुद्ध उमट,डॉ. तनवीर मालावत, शहर कांग्रेस अध्यक्ष मदन मेघवाल,सुरेंद्र धारणिया, कांग्रेस देहात जिलाध्यक्ष बिसनाराम सियाग, नगर विकास न्यास के पूर्व अध्यक्ष मकसूद अहमद, कांग्रेस नेता डॉ तनवीर मालावत, संजय आचार्य, जियाउर रहमान आरिफ, नितिन वत्सस, विमल भाटी, प्रकाशक डॉ. प्रशांत बिस्सा, वास्तुशास्त्री आर. के. सुतार, कांग्रेस नेता महिपाल सारस्वत, पत्रकार रौनक व्यास, जय नारायण बिस्सा, अरविंद व्यास, योगेश राजस्थानी, घनश्याम स्वामी, महेश भादाणी, प्रिया शर्मा, व्यवसायी ऋषि मोहन जोशी,विक्रम स्वामी,एडवोकेट बलजीत, योगेश गहलोत,शरद आचार्य,व्यवसायी नरेश गोयल, के एल बोथरा, डॉ. नवदीप बैंस, मधुसूदन आचार्य, जेठमल सुथार, भूपेंद्र मिड्ढा,विनोद भोजक, गिरिराज खैरीवाल, सीताराम कच्छावा, साहित्यकार बुलाकी शर्मा, चंचला पाठक, संजय पुरोहित, अमित गोस्वामी, असित गोस्वामी, इरशाद अज़ीज़, संजय आचार्य 'वरूण',  शिव दाधीच, विप्लव व्यास, नृसिंह बिन्नाणी, कामरेड अविनाश व्यास, सावन पारीक, अलका डॉली पाठक, डॉ. मीना आसोपा,अश्मा नाज़, चित्रेश गहलोत,ज्योति प्रकाश रंगा, चन्द्र शेखर श्रीमाली, आनंद स्वामी सहित अनेक गणमान्य उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन रवींद्र हर्ष ने किया।

ललित रत्तावा

लेखक

ललित रत्तावा

कवि और कला समीक्षक ललित रत्तावा समसामयिक विषयों पर लिखते रहे हैं। रंगकर्म और संगीत के क्षेत्र में विशेष अभिरुचि रखते हैं।

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