समाचार विश्लेषण
नहीं रहे आरके दास, चुनावी बाड़ेबंदी वाले परेशान दीवाली तक न सफाई होनी और न उठना कचरा
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साप्ताहिक विनायक से साभार
पूरे प्रदेश की तर्ज पर बीकानेर में भी इन दिनों गांव की सरकार के चर्चे है। जहां परिणाम आ गए हैं, वहां विजय का उल्लास है, हार का अफसोस है और परवान चढ़ी गुटबाजियों के बीच हारने वालों का आक्रोश भी सामने आ रहा है। बीकानेर के केलां, मोतीगढ़ आवां आदि में गाली-गलौज, झड़प और मारपीट के मामले सामने आए हैं। पचास से अधिक लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इस बीच दूसरे चरण की तैयारियां शुरू हो गई है। बीच में दीपावली होने की वजह से जीतने की आस में वोट घेरने वाले परेशान हैं, क्योंकि दीपावली पर बाड़ेबंदी संभव नहीं है। 20 नवंबर के बाद ही स्थितियां सुधरेंगी। 25 को जिला प्रमुख के चुनाव होंगे। फिर 26 को उप जिलाप्रमुख, 27 को प्रधान और 28 नवंबर को उपप्रधान के चुनाव होंगे। कांग्रेस इस चुनाव को काबू में रखना चाहती है, भाजपा भी जोड़तोड़ में लगी है। भाजपा के नेता संजय भाटिया ने भी पहुंचकर नेताओं को जीत का मंत्र दिया है। संजय भाटिया शायद नहीं जानते कि लोकतंत्र के इस यज्ञ में सारे मंत्र जनता के हाथ में ही हैं।
पीबीएम अस्पताल की मेडिसिन विंग में भी अव्यवस्थाओं की शिकायतें सामने आने लगी है। मेडिसिन विंग में बेड नहीं मिलने की समस्या के चलते मरीज परेशान हैं। इस विंग में अतिरिक्त मरीज भेजे जाने की जानकारियां भी सामने आई हैं, जिससे अव्यवस्था हो गई है। इस बीच पीबीएम अस्पताल में किडनी और लिवर जांच में काम आने वाली मशीन ने भी काम करना बंद कर दिया है। गंगाशहर के सैटेलाइट अस्पताल में भी समस्याएं बेशुमार हैं।
दीपावली आने से पहले शहर की सफाई और रोशनी की व्यवस्था के दावे औंधे मुंह गिर चुके हैं। सारा शहर गंदगी से अटा पड़ा है और सफाई के लिए लगाए गए टिपर्स दो ट्रिप में ही दम तोड़ देते हैं। सिटी बसें पहले ही भेज दी गई हैं, क्योंकि वे यहां के ऑटो से मुकाबला नहीं कर पा रही है। रोडवेज की बसों से जैसे लोक परिवहन की बसें मुकाबला नहीं कर पाती हैं। कुल मिलाकर जिन्हें व्यवस्था करने का दायित्व दिया गया है, वे गंभीर नहीं हैं। इस बीच नया दावा यह भी है कि शहर में 40 स्थानों में पार्किंग स्थल बनाए जाएंगे। प्रशासन को शायद पता नहीं है कि पहले से ही 20 से अधिक अवैध पार्किंग स्थल लोगों की कमाई का जरिया बने हुए हैं। इन स्थलों की जांच-पड़ताल करके अगर घोषित पार्किंग स्थल बना दिए जाएं तो राजस्व सरकार के खाते में जाएगा। कोटगेट पर बनने वाले आरयूबी को डबल लाइन बनाने पर सहमति हो गई।
अपहरण और फिरौती की धमकियों के मामले में विष्णु साध को व्यवसायी मनीष लांबा के साथ गिरफ्तार किया गया। लांबा को बाद में छोड़ दिया गया, लेकिन विष्णु से राज उगलवाए जा रहे हैं। गैंगस्टर द्वारा स्थानीय व्यवसायियों को धमकियां देने की घटनाओं के बाद सक्रिय हुई पुलिस पर यह आरोप है कि सिर्फ नशे के विरुद्ध ही कार्य हो रहा है, फिर भी शहर में जगह-जगह नशा मिल रहा है। इस बीच सांस्कृतिक-साहित्यिक कार्यक्रम भी चल ही रहे हैं। शरद पूर्णिमा पर काव्यगोष्ठियां हुईं तो जन-मन काव्य यात्राओं में भी मंचीय कवियों को अवसर मिलने लगा है। इस सप्ताह रामचंद्र गुहा की किताब 'आखिरी उदारवादी और अन्य आलेख' तथा अशोक कुमार पांडेय की 'हिंसा-अहिंसा और भगतसिंह' पर चर्चा का कार्यक्रम रखा गया।
बीकानेर की आवाज को विधानसभा से लेकर सड़क तक गुंजायमान रखने वाले एडवोकेट डॉ. रामकृष्णदास गुप्ता नहीं रहे। पिछले कुछ समय से वे अस्वस्थ थे, बुधवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। उनकी इस अंतिम सांस के साथ ही निर्विवाद रूप से इस शहर की ब्यूरोक्रेसी पर कभी भी लग जाने वाला अंकुश नहीं रहा। समय लगेगा दूसरा रामकृष्णदास गुप्ता पैदा होने में। अपनी धुन के पक्के और सिद्धांत की बात करने वाले गुप्ता ने जितना समय पीडि़त को न्याय दिलाने के लिए दिया, उससे कहीं ज्यादा इस शहर को सुविधाएं दिलाने के लिए भी खर्च किया। बीकानेर को हावड़ा सुपरफास्ट दिलाने का श्रेय रामकृष्णदास गुप्ता को ही है, जिन लोगों ने कोटगेट पर उनके धरने को देखा है, वे यह भी जानते थे कि यह धरना उन्होंने शुरू नहीं किया था, लेकिन अब उनसे नेतृत्व करने का अवसर मिला तो पीछे भी नहीं हटे। बीकानेर को हाइकोर्ट बैंच देने की मांग पर शुरू हुआ आंदोलन भी गुप्ता की देन है और रेल फाटक की समस्याओं के समाधान के लिए हर बार मांग करने वाले गुप्ता ही थे, जिन्हें अगर कुछ पसंद नहीं था तो नहीं ही था। पत्रकारिता में अभयप्रकाश भटनागर और वकालत में रामकृष्णदास गुप्ता ने भले ही घर नहीं बसाया, लेकिन उन्होंने जिस तरह से शहर के हक-हकूृक के लिए काम किया, सारा शहर ही उनका परिवार हो गया।
दिल का सूना साज तराना ढूंढ़ेगा
मुझको मेरे बाद जमाना ढूंढ़ेगा
लेखक
हरीश बी शर्मा
पत्रकारिता का लंबा अनुभव। दैनिक भास्कर सहित लोकमत, निर्भय कलम, लॉयन एक्सप्रेस आदि अखबारों में बतौर पत्रकार कार्य किया। राजसूय के सलाहकार संपादक। राजसूय के संस्थापकों में से एक।