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राजनीती: कांग्रेस ने हारे हुओं को दी पंचायत चुनाव जिताने की टास्क!

पुराने नेता, संगठन और देहात अध्यक्ष को किनारे करने की क्या है वजह

कांग्रेस ने हारे हुओं को दी पंचायत चुनाव जिताने की टास्क!
राजसूय
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राजसूय। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा द्वारा बीकानेर जिले की तमाम पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद के 41सदस्यों के टिकट वितरण की बागडोर उन नेताओं को सुपुर्द कर दी है, जिन्होंने सन 2023 का विधानसभा चुनाव लड़ा था।

कोलायत क्षेत्र में भंवर सिंह भाटी, लूणकरणसर क्षेत्र में राजेन्द्र मूंड, डूंगरगढ़ क्षेत्र में मंगला राम गोदारा, खाजूवाला क्षेत्र में गोविन्द राम चौहान और नोखा क्षेत्र में सुशीला देवी डूडी ही अपने एरिया में आने वाले जिला परिषद के वार्ड और अपने क्षेत्र की पंचायत समिति के सदस्यों को पार्टी सिंबल देने का जिम्मा सौंप दिया गया।

पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य के टिकट वितरण में देहात कांग्रेस जिलाध्यक्ष की कोई भूमिका ही नहीं रखी गई। देहात अध्यक्ष को टिकट वितरण में जीरो कर दिया गया।

ऐसे में संगठन और संगठन के कार्यालय का औचित्य ही खत्म सा हुआ लग रहा है।

हालांकि, खबर यह भी है कि बीकानेर जिले के ग्रामीण इलाकों में इन नेताओं का भयंकर विरोध है। इसके चलते लूणकरणसर, नापासर, डूंगरगढ़, खाजूवाला और नोखा क्षेत्र में कांग्रेस पार्टी को नगर पालिका चुनाव में शिकस्त खानी पड़ी थी, इस बात भी ऐसे ही हालात पेश नहीं आ जाएं।

सन 2023 के विधानसभा चुनाव में जिले की सात सीटों में से केवल मात्र एक नोखा की सीट के अलावा कोई भी सीट प्राप्त करने में कांग्रेस पार्टी को सफ़लता हासिल नहीं हो पाई थी।

सुशीला देवी की जीत करीबन आठ हजार वोट से बड़ी मुश्किल से हो पाई थी और यह सच्चाई है कि नोखा में कुल 2,14,108 वोट में से सुशीला देवी को मात्र 83,215 वोट ही मिले और इनके विरोध में 1,30,893 वोट गए, यह तो अच्छा हुआ कि कन्हैयालाल झवर को 33,781 वोट मिल गए और जिसकी वजह से यह अकेली सीट कांग्रेस की झोली में आई।

बाकि छः सीटों में कांग्रेस पार्टी की बुरी तरह से हार हुईं थी। सन 2023 में देहात क्षेत्र की बाकि चारों सीटों में कांग्रेसी नेताओं की हालत गंभीर और पतली हो गई थी।

कोलायत विधानसभा क्षेत्र में पूर्व मंत्री भंवर सिंह भाटी को कुल मतदान हुए 2,01,867 वोट में मात्र 68,160 वोट ही मिले यानि केवल 33.74 प्रतिशत वोट ही मिले, चुनाव का आलम यह रहा था कि 1,33,858 वोट कांग्रेस के विरोध में जनता ने कास्ट किए गए थे।

डूंगरगढ़ में कांग्रेस प्रत्याशी मंगला राम गोदारा को कुल कास्ट हुए 2,01,867 वोट में से मात्र 57,565 वोट ही मिल पाए यानि 28.51 प्रतिशत वोट ही कांग्रेस प्रत्याशी को मिल पाए, अर्थात इनके विरोध में 1,44,302 वोट कास्ट हुए।

लूणकरणसर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस पार्टी ने राजेन्द्र मूंड को टिकट दी थी, इन्हें 51,583 वोट मिले, जबकि कुल 2,01,602 वोट कास्ट किए गए थे यानि इनके विरोध में 1,50,017 वोट जनता ने कास्ट किए। इन्हें केवल 25.81 प्रतिशत लोगों ने ही वोट दिए थे।

खाजूवाला विधानसभा क्षेत्र में सन 2018 में कांग्रेस प्रत्याशी गोविन्द राम चौहान की 31,000 से अधिक वोट से जीत हुई थी, खाजूवाला विधानसभा क्षेत्र शुद्ध रूप से कांग्रेस बैल्ट है, जिसमें मुस्लिम, दलित और जाट समाज का बाहुल्य है और जिसे राजस्थान का वायनाड भी कहा जाता है ।

 खाजूवाला विधानसभा क्षेत्र में सन 2023 में कुल वोट 1,77, 425 वोट कास्ट हुए जिसमें कांग्रेसी बैल्ट होने के बावजूद कांग्रेस प्रत्यासी को 73,902 वोट ही मिले यानि केवल 41.65 प्रतिशत वोट मिले अर्थात 59..35 प्रतिशत यानि 1,03,523 लोगों ने इनके विरोध में वोट कास्ट किए।

ऐसे में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष द्वारा पंचायत चुनाव की तमाम टिकट वितरण का अधिकार इन हारे हुए प्रत्याशियों के सुपुर्द कर दिए जाने का फैसला कांग्रेस के दूसरे नेताओं की समझ से परे माना जा रहा है।

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि 2028 में होने वाले चुनाव में अभी से इन पांचों विधानसभा क्षेत्रों की लीडरशिप इन पांचों नेताओं को ही सौंपी जा सकती है।

इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि लूणकरणसर विधानसभा क्षेत्र में भीमसेन चौधरी और उनके पुत्र वीरेन्द्र बेनीवाल का भारी प्रभाव है, भीमसेन चौधरी ने बरसों इस क्षेत्र की सेवा की है, वीरेन्द्र बेनीवाल ने इस क्षेत्र से पांच चुनाव लड़े हैं, दो दफा विधायक रहे, प्रदेश में होम मिनिस्टर रहे, लेकिन पंचायत समिति और जिला परिषद चुनाव में इनकी कोई पंचायती नहीं रखी गई।

आरोप तो यहां तक लगाए जा रहे हैं कि भाजपा और आरएसएस से संबंधित लोगों को कांग्रेस पार्टी की टिकट से नवाज़ दिया गया है।

यही हालात कमोबेश श्रीडूंगरगढ़, खाजूवाला, नोखा, कोलायत और बीकानेर पंचायत समितियों के हैं। सवाल यह है कि यदि कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा टिकट वितरण में कोई भूमिका या दखलंदाजी नहीं रहेगी तो क्या कांग्रेस कार्यालय बना ही क्यों।

यहां यह भी ध्यान देने वाली बात है कि गोविन्द सिंह डोटासरा को अक्सर पब्लिक मीटिंग में बोलते देखा गया है कि सन 2013 में नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी ने उनको आगे बढ़ाने का काम किया। अब रामेश्वर डूडी की पुत्रवधु निकिता डूडी  जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ रही है।

ऐसे में यह सवाल लाजिमी है कि क्या डोटासरा का प्रयास रहेगा कि रामेश्वर डूडी की पुत्रवधु को बीकानेर जिले में जिला प्रमुख बना दिया जाएगा। हालांकि, अभी बहुत कुछ वक्त के गर्भ में है, लेकिन कांग्रेस की स्थिति पर समीक्षा जरूरी है।

मोहब्बत अली तंवर

लेखक

मोहब्बत अली तंवर

एडवोकेट एवं राजनीतिक विश्लेषक मोहब्बत अली तंवर की बीकानेर की स्थानीय राजनीति पर गहरी पकड़ है। समय-समय पर की गई इनकी टिप्पणियां दूरअंदेशी साबित हुई है।

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