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राजनीति: गहलोत का बीकानेर दौरा, एक तीर-कई शिकार

डूडी गुट की नाराजगी मोल ले ली गहलोत ने, असर पंचायत चुनाव पर पड़ेगा

गहलोत का बीकानेर दौरा, एक तीर-कई शिकार
राजसूय
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राजसूय। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एक दिन के दौरे पर बीकानेर आये और एक तीर से कई शिकार कर गये। गहलोत आये गोविंद मेघवाल के बुलावे पर, जवाब डोटासरा को दे दिया। अपने समर्थक नेताओं को संभाल लिया मगर डूडी गुट की नाराजगी झेलनी पड़ गई। जाट समुदाय की भौंहे तननी वाजिब ही थी। अब बीकानेर पंचायत चुनाव पर क्या असर पड़ेगा, यह वक्त बतायेगा।

बीकानेर में पंचायत राज चुनाव के लिए अब बिसात पूरी तरह से बिछ गई है। राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गयी है और कूटनीति के चक्र भी चलने शुरू हो गए हैं। बीकानेर में पहली बार 30 साल बाद किसान केसरी स्व रामेश्वर डूडी की अनुपस्थिति में चुनाव हो रहे हैं। उनके असामयिक निधन के बाद ये पहले पंचायती राज चुनाव है इस कारण उनके प्रति ग्रामीणों में एक सहानुभूति की लहर तो विद्यमान है ही, इससे इंकार नहीं किया जा सकता है। जब डूडी गंभीर रूप से अस्वस्थ थे तो विधानसभा चुनाव हुए थे। कांग्रेस ने उनकी धर्मपत्नी सुशीला डूडी को नोखा से टिकट दिया, वे चुनाव जीत गयी। इस बार उनकी पुत्रवधु निकिता डूडी चुनाव मैदान में है। जिला प्रमुख की सीट सामान्य वर्ग के लिए है तो कांग्रेस उनको इस पद के दावेदार के रूप में पेश कर रही है। बीकानेर जिला परिषद में वैसे भी हमेशा कांग्रेस का ही वर्चस्व रहा है।  जिला प्रमुख के लिए  कांग्रेस से दूसरी मजबूत दावेदार पूर्व मंत्री गोविंद मेघवाल की पुत्री सरिता चौहान है। मगर पिछले 6 महीनें से डूडी समर्थक व गोविंद मेघवाल आमने सामने है। सार्वजनिक प्रदर्शन, बयानबाजी, शिकायतें और सोशल मीडिया पर झगड़ा, सबके सामने है। मेघवाल का एक कथित ऑडियो व वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें डूडी पर कुछ अमर्यादित बातें थी। तब से ही मेघवाल देहात की राजनीति में अलग थलग पड़ गए और डूडी समर्थक उनके सामने खड़े हो गए। मेघवाल को गहलोत का निकटस्थ माना जाता है और यह वे दर्शाते भी रहे हैं। जब कथित वीडियो व ऑडियो वायरल हुआ और शोर मचा तो मेघवाल दूसरे ही दिन गहलोत के पास जयपुर पहुंच गए थे। समय समय पर मेघवाल गहलोत के प्रति अपनी निष्ठा दिखाते रहते हैं और गहलोत भी उनसे निकटता को प्रकट करते रहते हैं।
पिछली बार दावा फिसल गया था।

पिछली बार जिला प्रमुख का पद एससी के लिए आरक्षित था और उस समय गोविंद मेघवाल की सुपुत्री सरिता चौहान चुनाव जीती हुई भी थी। प्रदेश नेत्तृव नेतृत्व भी उनको जिला प्रमुख उम्मीदवार बनाने के लिए मानस बना रहा था मगर स्व रामेश्वर डूडी ने मोडाराम मेघवाल का नाम आगे कर दिया। पीसीसी से उनकी टकराहट भी हुई। मगर वोट डूडी के पास थे। इस सूरत में डूडी की बात को मानना पड़ा और मोडाराम मेघवाल उम्मीदवार भी बने और जिला प्रमुख भी। सरिता चौहान नहीं बन सकी। उस कमी को गोविंद मेघवाल अब पूरा करना चाहते हैं। मगर चुनाव से पहले डूडी गुट से टकराहट हो जाने के कारण खेल बिगड़ गया। 

गहलोत के जरिये फिर से मुख्य धारा में आने की कोशिश
देहात की राजनीति में शक्तिशाली होते हुए भी अलग - थलग पड़े मेघवाल अब अशोक गहलोत के जरिये मुख्य धारा में आने की कोशिश कर रहे हैं। उनको पता है कि नोखा विधायक सुशीला डूडी, देहात अध्यक्ष बिसनाराम व डूडी समर्थक पीसीसी चीफ गोविंद डोटासरा के निकट है तो उनके लिए एकमात्र आस अशोक गहलोत ही बचे थे। इस वजह से उन्होंने अपने स्तर पर 13 अक्टूबर को गहलोत को बीकानेर बुलाया। नाल में चुनावी सभा कराई। गहलोत थे तो सभा में डॉ बी डी कल्ला भी पहुंचे। भले ही देहात अध्यक्ष नहीं दिखाई दिए। देहात अध्यक्ष सियाग की तरफ से न तो चुनावी सभा का निमंत्रण था, न पीसी का। यह काम गोविंद मेघवाल व कल्ला ने किया। अपने साथियों को संभालना था तो गहलोत भी आये, हालांकि उनको वापस दिल्ली लौटना पड़ा जिससे वे श्रीडूंगरगढ़ में चुनावी सभा नहीं कर सके।

डोटासरा - जुली के दौरे का काउंटर तो नहीं?
राजनीतिक गलियारों में गहलोत के इस बीकानेर दौरे को गोविंद डोटासरा व टीकाराम जुली के बीकानेर दौरे का काउंटर भी माना जा रहा है। डूडी की पुण्यतिथि पर हुई सभा मे इन दोनों नेताओं को बुलाया गया था। उन्होंने सभा में डूडी को श्रद्धांजलि देने की बात कहते हुए संकल्प दिलवाया कि ये चुनाव जीतकर उनको सच्ची श्रद्धांजलि दी जाये। इन दिनों राज्य में केवल गहलोत व सचिन पायलट के ही गुट नहीं माने जा रहे हैं, डोटासरा के भी पृथक गुट का वजूद माना जा रहा है। राजनीति के जानकारों का मानना है कि अपने समर्थक गोविंद मेघवाल के बुलावे पर बीकानेर आकर गहलोत ने डोटासरा व जुली को राजनीतिक जवाब दिया है। पिछले दिनों जब बांसवाड़ा के नेताओं ने कांग्रेस की सदस्यता ली तो पहले गहलोत के निवास गए और नारे लगाए, जिस पर डोटासरा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। ये दौरा उसका भी जवाब था। गहलोत का हर कदम एक गहरा राजनीतिक अर्थ लिए हुए होता है, यह सब जानते हैं। इस बीकानेर दौरे को भी उसी तरह देखा जा रहा है। गहलोत ने एक तरह से डोटासरा - जुली के दौरे को काउंटर किया है।

डूडी गुट की नाराजगी मोल ली है एक तरह से गहलोत ने
बीकानेर देहात की राजनीति इस समय बड़ी उलझी हुई है। क्योंकि लाख कोशिशों के बाद भी डूडी समर्थकों व गोविंद मेघवाल के बीच मधुर संबंध नहीं बने है। खींचतान कम के आसार भी नहीं लग रहे। इस पृष्ठभूमि में हम देखें तो गहलोत ने मेघवाल के बुलावे पर आकर केवल उनके विधानसभा क्षेत्र में सभा करके डूडी समर्थकों की नाराजगी ही मोल ली है। 

गहलोत जिस कद के नेता हैं, उस हिसाब से उनको संतुलन बिठाना चाहिए था। मगर अभी का दौरा तो इकतरफा होकर रह गया है और डूडी समर्थक इससे नाराज भी हो गए हैं। इससे गहलोत की राजनीति पर तो असर बाद में पड़ेगा मगर पंचायत राज चुनाव  पर जरूर पड़ेगा। कांग्रेस के लिए परेशानी कम नहीं होगी, बढ़ेगी ही।

मधु आचार्य 'आशावादी'

लेखक

मधु आचार्य 'आशावादी'

राजसूय के संरक्षक

दैनिक भास्कर के कार्यकारी रहे संपादक मधु आचार्य 'आशावादीÓ साहित्य के क्षेत्र में भी जाने-पहचाने नाम हैं। पत्रकारिता की शुरुआत राष्ट्रदूत से की। इन दिनों आरएनई के लिए सेवाएं दे रहे हैं। राजसूय के संरक्षक।

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