राजनीति
राजनीति विश्लेषण: क्या नरेंद्र मोदी बचा लेंगे मदन राठौड़ को...
पाकिस्तान संबंधी बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में एक ही सवाल
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राजसूय,
भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के पाकिस्तान को लेकर दिए बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। हालांकि, बाद में इस बयान को एडिटेड बताकर राठौड़ ने अपने स्तर पर ही निपटने की यह कहते हुए कोशिश की थी कि यह बात क्रिकेट के संदर्भ में थी, लेकिन तब तक इस बयान ने सुर्खियां हासिल कर ली।
इसके बाद से राजनीतिक गलियारों में यह सवाल खड़ा है कि क्या मदन राठौड़ के साथ भी वही होगा, जो लालकृष्ण आडवाणी और जसवंतसिंह के साथ हुआ था। पाकिस्तान में जिन्ना की मजार पर श्रद्धासुमन अर्पित करने के बाद लालकृष्ण आडवाणी कभी भी मु यधारा में नहीं लौट सके। जसवंतसिंह की किताब ने उन्हें भाजपा में किनारे रखवा दिया। ऐसे में सवाल यह है कि क्या भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष बने मदन राठौड़ अपने बयान के बाद भी पद पर रह पाएंगे। कई बार यह जता चुके कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके पुराने संबंध हैं तो क्या नरेंद्र मोदी उन्हें बचा पाएंगे? क्या मदन राठौड़ के कहे को संघ की शाखाओं में होने वाले बौद्धिक में सुनाई जाने वाली कहानी 'वयं पंचाधिकम शतम' से निकले सबक भाई-भाई को हमेशा एक रहना चाहिए से जोड़ते हुए माफ कर दिया जाएगा?
इस मसले के बाद खुद मदन राठौड़ भी सकपकाए हुए हैं। पहले तो उन्होंने साफ तौर पर इसे एडिटेड और संदर्भ को हटाकर पेश करने वाला बताया। फिर उन्होंने यह भी कहा कि वे ऐसा सोच भी नहीं सकते, उनका बयान अमेरिका और पाकिस्तन में युद्ध से नहीं बल्कि क्रिकेट से जुड़ा हुआ था, जिसे गलत तरीके से जोड़ा गया। उन्होंने इसे राजनीतिक साजिश भी बताया, जिसके बाद यह भी सवाल खड़ा हो गया है कि मदन राठौड़ के खिलाफ राजनीतिक रूप से साजिश करने से किसका फायदा होगा जबकि इन दिनों प्रदेश में मु यमंत्री भजनलाल शर्मा और भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष के रूप में मदन राठौड़ के बीच अच्छी ट्यूनिंग के चर्चे हैं।
हालांकि, यह भी कहा जा रहा है कि उन्हें पहले इस बयान की गंभीरता का अंदाजा नहीं था, लेकिन जैसे ही कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने इस बयान को भुनाते हुए प्रदर्शन किए,स्थितियां बदल गई। वैसे भी विपक्ष के पास इन दिनों इस्तीफे मांगकर सरकार को दबाव में रखने की रणनीति 'तुरूप के इक्के' की तरह इस्तेमाल हो रही है। केंद्र ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा करवाकर विपक्ष को जोश बढ़ा दिया। इन दिनों मु य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा लेने की मांग पर विपक्ष अड़ा हुआ है। ऐसे में राजस्थान कांग्रेस भी हाथ आया मौका क्यों छोड़ती है।
लालकृष्ण आडवाणी और जसवंतसिंह की केस-हिस्ट्री को देखते हुए यही लग रहा है कि मदन राठौड़ पर कार्रवाई होगी। इस बीच उनसे इस संबंध में पूछताछ भी होने की बात सामने आई है। अगर भाजपा अपनी परिपाटी निभाती है तो तय है कि कांग्रेस इसे अपनी जीत की तरह प्रचारित करेगी।
नरेंद्र मोदी से हैं पुराने संपर्क, सुनाते रहे हैं किस्से...
मदन राठौड़ अपने कार्यक्रमों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पुराना परिचय होने की बात करते हुए कई किस्से भी सुनाते हैं, जिसमें 1976 का एक वाकया भी है, जब उनकी मुलाकात नरेंद्र मोदी से हुई, जब वे एक सरदार के वेश में थे। प्रचारक के रूप में वेश बदलकर पहुंचे नरेंद्र मोदी ही थे, यह मदन राठौड़ को बहुत बाद में पता चला। लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा के दौरान भी वे नरेंद्र मोदी से मिलने का हवाला देते हैं। ऐेस में अब यह सवाल है क्या मदन राठौड़ नरेंद्र मोदी को कन्वे कर पाएंगे?
लेखक
हरीश बी शर्मा
पत्रकारिता का लंबा अनुभव। दैनिक भास्कर सहित लोकमत, निर्भय कलम, लॉयन एक्सप्रेस आदि अखबारों में बतौर पत्रकार कार्य किया। राजसूय के सलाहकार संपादक। राजसूय के संस्थापकों में से एक।